कविता

दीपावली बनाम दिवाली

| Shashikant Singh’Aaneh’ | कही तो जलता होगा छत पर मुंडेर के गर्दन को पकडे नई नई मिट्टी से बनकर सरसो के तेल का पान…

तभी तो उम्र से बड़ा हूँ

हमेशा ख़ुद से लड़ा हूँ तभी तो उम्र से बड़ा हूँ कई समंदर है मेरे अंदर लगता मिट्टी का घड़ा हूँ ठोकरें खाता रहा तो…

औरत

| गुमनाम |     मुझे अच्छा लगता है मर्द से मुकाबला ना करना और उस से एक दर्जा कमज़ोर रहना – मुझे अच्छा लगता…

एग्जाम के बाद

| Shashikant Singh ‘Aaneh’ |   रे गौरैया दाना चुग के हारिल मुँह में लकड़ी लेकर शाम ढलते सूरज के लाल गोले में एक एग्जाम पास…

Happy New Year | Aaneh |

“आपको और आपके परिवार को नए वर्ष 2018 की हार्दिक शुभकामनाएं व नया साल आपके जीवन में सुख, समृद्धि, वैभव,सुख-शांति, सौहार्द एवं अपार खुशियों की रोशनी…

Udbhav

Udbhav-2 teaser | Shashikant Singh | Aaneh |

आपके लिए एक बार फिर हम जल्द ही लेकर आ रहे हैं ‘उद्भव-2’ उद्भव दिनांक २६ जनवरी  शुरू होने जा रह है |  अगर आप…

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Udbhav-2 teaser | Shashikant Singh | Aaneh |

आपके लिए एक बार फिर हम जल्द ही लेकर आ रहे हैं ‘उद्भव-2’ उद्भव दिनांक २६ जनवरी  शुरू होने जा रह है |  अगर आप…

Poetry on Love | Shashikant Singh | Aaneh |

  लहरे तो मचलती रही मगर समंदर उदास था बर्बाद वक़्त का बिता हुआ हर मंजर उदास था। टूटकर मिलें थे जब हम आख़िरी बार…

Happy New Year | Aaneh |

“आपको और आपके परिवार को नए वर्ष 2018 की हार्दिक शुभकामनाएं व नया साल आपके जीवन में सुख, समृद्धि, वैभव,सुख-शांति, सौहार्द एवं अपार खुशियों की रोशनी…

दीपावली बनाम दिवाली

| Shashikant Singh’Aaneh’ | कही तो जलता होगा छत पर मुंडेर के गर्दन को पकडे नई नई मिट्टी से बनकर सरसो के तेल का पान…

छल…

     छल…                        –शशिकान्त सिंह ‘आनेह’ देश कर रहा हाहाकार ,भक्तों बोलो मोदी-मोदी मंत्री कर रहे बंटाधार, भक्तों…

शंखनाद

           युवा और भारतीय राजनीति                                …

कालिख़

               कालिख़                            -शशिकान्त सिंह ‘आनेह’  …

काव्य चर्चा

“घृणा-पर्व”

           घृणा-पर्व                   -शशिकान्त सिंह’आनेह’ एक पांच साल की बच्ची हूँ मैं, वसुधा की सर्वोत्तम कृति हूँ मैं, तुम्हारे मर्दाना छाप के लिए, तुम्हारे हवस…

बापू…

थी सख़्त बेड़ियाँ पावों में आँखों में मरने लगा था ख़्वाब जब भयभीय कर रही थी दासता परतंत्र में जकड़ा दोनों हाँथ तब तिमिर में…

उरी

तन गयी बंदूके फिर से, धरा हुआ यु फिर से लाल हैवानों ने खेली ख़ू की होली, मानवता हुई शर्मसार रुधिर चढ़ा फिर इन आँखों…

हिंदी हूँ मैं…

मैं हूँ हिंदी, हिंदी है मुझमे रोम -रोम में , मन चितवन में प्राण-प्राण में, आभा के उपवन में मैं उसमे होकर जीता हूँ, वो…

लम्पटलाल की ख़ातिरदारी यात्रा…

गीत गाया, परफ्यूम लगाया जीन्स डाली, नकली लिवाइस वाली बालों में चमेली का तेल क्रीम लड़कियों पुताई वाली फिर लम्पटलाल बन बवाल चले एक दिन…

कहानी

वेश्या

  ईंट सीमेंट की बनी दड़बानुमा इमारत की दर्जनों खिड़कियाँ उस बदनाम सड़क की तरफ खुलती थीं, जहाँ शाम डूबते-डूबते रंगीनियाँ जवान होने लगतीं थीं।…

औरत

| गुमनाम |     मुझे अच्छा लगता है मर्द से मुकाबला ना करना और उस से एक दर्जा कमज़ोर रहना – मुझे अच्छा लगता…

तीन लाशें

  |शशिकान्त सिंह ‘आनेह’|        अम्मा! अब बस मार दो | नहीं सह सकती इतना दर्द, इतनी तकलीफ़ | आखिर पापा इतना परेशान…