अनर्गल इश्क़…

उसकी आँखों के अनगढ़ मोती
मेरे आँखों का बहता पानी
ये सुर्ख़ मोहब्बत चीज है ऐसी
जिसमे गढ़ती रहती प्रेम कहानी
मैं इस सागर के तट पर बैठा और
पांव पखारे आँखों का खारा पानी
हर मंजिल पर पता हो उसका
हर पथ पर हो उसकी निशानी
उसकी आँखों के अनगढ़ मोती
मेरे आँखों का बहता पानी
वो बदली बनकर मिलने आये
मैं घटा सरीखे बरस सा जाऊँ
वो मेरे चेहरे का मूक उजाला
मैं बदन पर उसके तिल की निशानी
उसकी आँखों के अनगढ़ मोती
मेरे आँखों का बहता पानी

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